राहुल का केंद्र पर सीधा हमला: ‘क्या गोली चलाने के आदेश थे? गृह मंत्री संसद में आकर दें जवाब’

नई दिल्ली (विशेष संवाददाता) , संसद के जारी सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच तनातनी और तीखी हो गई है। सरकार की ओर से गतिरोध खत्म करने के संदेशों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने अपना रुख पूरी तरह सख्त कर लिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं—कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी—ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर सीधा हमला बोला।
राहुल गांधी ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार को देश के सामने यह साफ करना होगा कि “क्या छात्रों पर पेलेट गन और गोली चलाने के आदेश दिए गए थे?”
‘सरकार का पूरा ध्यान गृह मंत्री की छवि बचाने पर’
संसद के गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश से जुड़े मुद्दों को सुनने के बजाय सिर्फ गृह मंत्री की छवि को संवारने में लगी है।
राहुल गांधी ने कहा कि”पिछले 15 दिनों से जारी इस गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह में इतना साहस नही दिखा कि वे सदन में आकर विपक्ष के सवालों का सामना कर सकें।”
उन्होंने साफ किया कि विपक्ष सिर्फ औपचारिक चर्चा नहीं चाहता, बल्कि उसकी तीन शर्तें स्पष्ट हैं:
- छात्रों पर कार्रवाई का जवाब: गृह मंत्री अमित शाह खुद संसद में आकर युवाओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई का ब्योरा दें।
- प्रधानमंत्री की जवाबदेही: पूरे मामले पर प्रधानमंत्री देश से माफी मांगें।
- ‘चंदा चोरी’ पर चर्चा: चुनावी फंडिंग और चंदा चोरी के मुद्दे पर संसद में विस्तार से चर्चा कराई जाए।
झारखंड घटना और हिंसा पर रुख साफ :
संवाददाता सम्मेलन के दौरान जब झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और बल प्रयोग पर सवाल पूछा गया, तो राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का स्टैंड साफ किया:
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार: राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे छात्रों पर बल प्रयोग पूरी तरह गलत है।
- राज्य सरकार को सलाह: उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को छात्रों की मांगों और बातों को सुनना चाहिए।
- खरगे का बयान: कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के खिलाफ होने वाली किसी भी हिंसा का पुरजोर विरोध करती है, चाहे वह घटना किसी भी राज्य में हुई हो।
कांग्रेस के इस कड़े रुख से साफ है कि संसद का गतिरोध फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि गृह मंत्री के बयान और ‘चंदा चोरी’ जैसे मुद्दों पर बिना ठोस जवाब के संसद में कोई सहमति बनना मुश्किल है।
