खुलासा: विषय विशेषज्ञों ने ही लीक किए थे नीट-यूजी के सवाल; बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों से वसूले गए लाखों रुपये
सीबीआई का फास्ट ट्रैक कोर्ट में बड़ा खुलासा; 3 विशेषज्ञों समेत 13 आरोपी गिरफ्तार, उम्रकैद और 1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

नई दिल्ली (विशेष संवाददाता): नीट-यूजी (NEET-UG) प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के लिए अनुवाद कार्य में लगे तीन विषय विशेषज्ञों—पी.वी. कुलकर्णी (रसायन विज्ञान), मनीषा गुरुनाथ बंधारे (वनस्पति व प्राणी विज्ञान) और मनीषा संजय वाघमारे (भौतिकी)—ने ही गोपनीयता का उल्लंघन कर प्रश्नपत्र लीक करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के लिए 10 अगस्त की तिथि तय की है, जिस दिन आरोपियों के पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट की मांग पर भी फैसला सुनाया जाएगा।
तीन अलग-अलग तरीकों से किया गया पेपर लीक :
सीबीआई की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण (इमेजिंग) में सामने आया है कि आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीके से प्रश्नों को बाहर पहुंचाया:
- सादे कागजों की पर्चियां: गोपनीय कक्ष में अनुवाद के दौरान मुख्य साजिशकर्ता पी.वी. कुलकर्णी ने सादे कागजों पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्नों व उनके उत्तरों को संक्षेप में लिखकर छिपाकर बाहर भेज दिया।
- एनसीईआरटी किताबों में मार्किंग: मराठी अनुवादक मनीषा बंधारे ने होटल लौटने के बाद अपने वर्षों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में प्रश्नों से संबंधित महत्वपूर्ण पैराग्राफों पर निशान लगाए।
- याद करके लिखना: भौतिकी की अनुवादक मनीषा वाघमारे प्रश्नों को संक्षेप में याद कर लेती थीं और बाद में उन्हें लिखकर बिचौलियों तक पहुंचाती थीं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रिया में गंभीर खामियां :
जांच में एनटीए की सुरक्षा प्रणाली में बड़ी चूक उजागर हुई है। गोपनीय कक्ष में प्रवेश और निकास के समय विशेषज्ञों की उचित शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों का बैकअप केवल 20-25 दिनों का ही था और लाइव फीड मॉनिटरिंग के लिए कोई कंट्रोल रूम स्थापित नहीं किया गया था। समीक्षा व अनुवाद प्रक्रिया के एक से अधिक चरणों में शामिल होने के कारण विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्न पत्र सेट तक सीधी पहुंच मिल गई थी।
नए कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान :
बिचौलियों और कोचिंग संचालकों ने लीक हुए प्रश्नों और उनके उत्तर पीडीएफ व हार्ड कॉपी के रूप में अभ्यर्थियों तक पहुंचाए, जिसके बदले प्रति छात्र 12 लाख रुपये तक वसूले गए। सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। नए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून के कड़े प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा और 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
