भूमि अधिग्रहण मुआवजे की दर समान हो: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली (विशेष संवाददाता), भूमि अधिग्रहण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे की दर एकसमान होनी चाहिए, चाहे वह अधिग्रहण सरकारी जमीन का हो या निजी जमीन का. कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि भूमि का अधिग्रहण एक ही उद्देश्य के लिए किया गया है, तो जमीन मालिकों को दिया जाने वाला मुआवजा भी बराबर होना चाहिए।

जस्टिस बी. आर. गवई और बी. बी. नागरत्ना की पीठ ने यह फैसला कर्नाटक के एक मामले में सुनाया है. मामले में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड ने एक ही अधिसूचना के माध्यम से सरकारी और निजी जमीन दोनों का अधिग्रहण किया था. हालांकि, बोर्ड ने सरकारी भूमि के मुकाबले निजी जमीन के लिए कम मुआवजा तय किया था।
इसके खिलाफ निजी जमीन मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी दलील थी कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कोर्ट को एकसमान मुआवजे का आदेश देना चाहिए।
पीठ ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित की गई जमीन के लिए मुआवजे की दर समान होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि मुआवजे में भेदभाव करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
मुआवजे पर ब्याज देने से इन्कार: कोर्ट ने मुआवजे की बड़ी दर की वजह से अपील दाखिल करने में 4,427 दिनों की देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी की अवधि के लिए बढ़े हुए मुआवजे पर ब्याज देने से इन्कार कर दिया है।
एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि: कोर्ट ने कर्नाटक के भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में यह स्पष्ट किया कि एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित की गई भूमि के लिए किसानों का मुआवजा बढ़ाया जाना चाहिए।
4 लाख रुपए से बढ़ाकर साढ़े 5 लाख रुपए: कोर्ट ने मुआवजा 4 लाख रुपए से बढ़ाकर साढ़े 5 लाख रुपए कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भूमि अधिग्रहण के मामलों में जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. कोर्ट के फैसले से अब भूमि अधिग्रहण में भेदभाव की गुंजाइश कम हो जाएगी।
