लेखकः अवतार सिंह
भारत की भूमि कला की भूमि है, जहां समय-समय पर इस भूमि पर जन्म लेने वाले साधु-संत लोगों को सत्य के मार्ग से जोड़ते थे और समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाते थे। इसी तरह समय-समय पर इस धरती पर कलाकार भी पैदा होते हैं , जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया, जबकि समय-समय पर ऐसे कलाकारों को उनकी कला के लिए तत्कालीन सरकारों ,राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया गया है।

ऐसा कहा जाता है कि जब समय एक मोड़ लेता है, तो बड़े दिग्गज भी इसकी पकड़ में आ जाते हैं और अपना रास्ता बदल देते हैं। लेकिन यह बात डॉ. इला सांगा के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि समय ने निश्चित रूप से एक मोड़ ले लिया है लेकिन उनकी कला में कोई अंतर नहीं आया है। उनके पति, दलवीर सागा, गेल इंडिया में महाप्रबंधक थे। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया था। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे लकवे जैसी भयानक बीमारी के शिकार हो गए। उसके शरीर और उनकेेेे बोलने की शक्ति पर इसका गहरा असर पड़ा। कहा जाता है कि अगर कोई चाहे तो वह क्या नहीं कर सकता। इला सांगा ने अपने पति की भगवान के रूपमे पूजा करते रहे। भगवान ने उनकी सेवा को आशीर्वाद दिया है। आज वे लंबे समय के बाद चल सकते हैं और बात कर सकते हैं। उन्हें इस कला में बनाए रखने में उनके पति ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है, जिसकी बदौलत आज डॉ. इला सांगा अपने कला के प्रदर्शन के माध्यम से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर गुरबानी कीर्तन गाते हैं। उनके गुरबानी कीर्तन के शब्द विभिन्न धार्मिक चैनलों और कई कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं।
डॉ. इला सांगा आज दोराहा के हेवनलीीी पैलेस ( Home for Sr.Citizen) में अपने पति दलवीर सांगा के साथ खुशहाल जीवन जी रही हैं। मैं उनसे अक्सर मिलता रहता हूं क्योंकि वे मेरे परिवार का हिस्सा बन गए हैं।
चाहे यह मुलाकात लंबे समय के बाद हो या थोड़े समय के लिए, लेकिन उनके पास बैठने से सामाजिक संबंधों और पारिवारिक संबंधों को काफी गर्मजोशी मिलती है।
